तत्सम–तद्भव — हिंदी व्याकरण

JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, झारखंड पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हिंदी व्याकरण।

तत्सम–तद्भव — Hindi Grammar

Important Hindi Grammar for JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, Jharkhand Police and other competitive examinations.

📖 तत्सम–तद्भव क्या है?

जो शब्द संस्कृत भाषा से बिना किसी परिवर्तन के हिंदी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। संस्कृत के जो शब्द समय के साथ रूप बदलकर हिंदी में प्रचलित हुए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। तत्सम का अर्थ है— उसके समान, जबकि तद्भव का अर्थ है— उससे उत्पन्न।

📖 What is तत्सम–तद्भव?

🔍 इसे कैसे पहचानें?

किसी शब्द का मूल रूप यदि संस्कृत में मिलता है और हिंदी में भी लगभग उसी रूप में प्रयुक्त होता है, तो वह तत्सम शब्द है। यदि संस्कृत शब्द का रूप समय के साथ बदलकर हिंदी में प्रचलित हो गया है, तो वह तद्भव शब्द कहलाता है। जैसे— अग्नि का तद्भव आग, दंत का तद्भव दाँत और कर्ण का तद्भव कान है।

🔍 How to identify?

✏️ उदाहरण

तत्सम— अग्नि, दंत, कर्ण, नासिका, मुख, दुग्ध, रात्रि, सूर्य, चंद्र। तद्भव— आग, दाँत, कान, नाक, मुँह, दूध, रात, सूरज, चाँद। अन्य उदाहरण— हस्त → हाथ, पाद → पैर, अक्षि → आँख, जिह्वा → जीभ, ग्राम → गाँव, क्षेत्र → खेत।

✏️ Examples

⭐ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

तत्सम शब्द संस्कृत से बिना परिवर्तन के हिंदी में आए हैं, जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से रूप परिवर्तन के बाद हिंदी में प्रचलित हुए हैं। तत्सम और तद्भव शब्दों की पहचान के लिए उनके संस्कृत मूल रूप को जानना महत्वपूर्ण है। प्रतियोगी परीक्षाओं में तत्सम शब्द का तद्भव, तद्भव शब्द का तत्सम तथा सही तत्सम–तद्भव युग्म चुनने से संबंधित प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं।

⭐ Important for Examination


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