स्वर एवं व्यंजन — हिंदी व्याकरण

JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, झारखंड पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हिंदी व्याकरण।

स्वर एवं व्यंजन — Hindi Grammar

Important Hindi Grammar for JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, Jharkhand Police and other competitive examinations.

📖 स्वर एवं व्यंजन क्या है?

हिंदी भाषा में वर्णों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है— स्वर और व्यंजन। जो वर्ण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं, उन्हें स्वर कहते हैं। जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर की सहायता आवश्यक होती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

📖 What is स्वर एवं व्यंजन?

🔍 इसे कैसे पहचानें?

जो वर्ण स्वतंत्र रूप से बोले जा सकते हैं और जिनके उच्चारण में किसी अन्य वर्ण की सहायता नहीं लेनी पड़ती, वे स्वर हैं। जैसे— अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर की सहायता आवश्यक होती है, वे व्यंजन कहलाते हैं। जैसे— क, ख, ग, घ, च, त, प आदि।

🔍 How to identify?

✏️ उदाहरण

स्वर के उदाहरण— अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। व्यंजन के उदाहरण— क, ख, ग, घ, ङ; च, छ, ज, झ, ञ; ट, ठ, ड, ढ, ण; त, थ, द, ध, न; प, फ, ब, भ, म; य, र, ल, व; श, ष, स, ह। उदाहरण— कमल शब्द में क, म और ल तीन व्यंजन हैं तथा इनके उच्चारण में स्वर की सहायता होती है।

✏️ Examples

⭐ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

स्वर का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, जबकि व्यंजन के उच्चारण में स्वर की सहायता आवश्यक होती है। हिंदी में प्रमुख स्वर— अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ हैं। व्यंजन वर्गों में क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग और प-वर्ग प्रमुख हैं। उच्चारण के प्रमुख स्थान कंठ, तालु, मूर्धा, दंत और ओष्ठ हैं।

⭐ Important for Examination


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