कारक — हिंदी व्याकरण

JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, झारखंड पुलिस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हिंदी व्याकरण।

कारक — Hindi Grammar

Important Hindi Grammar for JSSC, JPSC, JSSC CGL, JTET, Jharkhand Police and other competitive examinations.

📖 कारक क्या है?

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों, विशेषकर क्रिया के साथ प्रकट होता है, उसे कारक कहते हैं। कारक से यह पता चलता है कि वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ क्या संबंध है।

📖 What is कारक?

🔍 इसे कैसे पहचानें?

वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध पहचानें। कारक की पहचान प्रायः विभक्ति-चिह्नों के आधार पर की जाती है। जैसे— राम ने पुस्तक पढ़ी। यहाँ ‘राम’ का संबंध ‘पढ़ी’ क्रिया से है और ‘ने’ कर्ता कारक का चिह्न है।

🔍 How to identify?

✏️ उदाहरण

हिंदी व्याकरण में कारक के आठ भेद माने जाते हैं— कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, संबंध, अधिकरण और संबोधन। इनके प्रमुख चिह्न हैं— कर्ता: ने, कर्म: को, करण: से/के द्वारा, संप्रदान: को/के लिए, अपादान: से, संबंध: का/के/की, अधिकरण: में/पर, संबोधन: हे/अरे/ओ। उदाहरण— राम ने मोहन को कलम से पत्र लिखा।

✏️ Examples

⭐ परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण

कारक के आठ भेद होते हैं— कर्ता कारक, कर्म कारक, करण कारक, संप्रदान कारक, अपादान कारक, संबंध कारक, अधिकरण कारक और संबोधन कारक। कर्ता का चिह्न ‘ने’, कर्म का ‘को’, करण का ‘से/के द्वारा’, संप्रदान का ‘को/के लिए’, अपादान का ‘से’, संबंध का ‘का/के/की’, अधिकरण का ‘में/पर’ तथा संबोधन का ‘हे/अरे/ओ’ प्रमुख चिह्न हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में कारक के भेद, विभक्ति-चिह्न और वाक्य में कारक की पहचान से संबंधित प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं।

⭐ Important for Examination


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